Hanuman Chalisa in English, Hindi, Marathi, Tamil, Bengali, Punjabi, Telugu, Kannada, Gujarati Nepali

यह हमें व्यापक रूप से ज्ञात है कि सकारात्मक लोग सकारात्मक ऊर्जा की ओर आकर्षित होते हैं; नकारात्मक लोग नकारात्मक ऊर्जा की ओर आकर्षित होते हैं। और कई बार स्थिति व्यक्ति को सकारात्मक या नकारात्मक ऊर्जा के प्रभाव में अच्छा/बुरा व्यवहार करने के लिए आकर्षित करती है। इस प्रकार दोनों ऊर्जाओं का प्रभाव अतिव्यापी है। अच्छे, दयालु लोगों के साथ निकटता रखने से व्यक्ति के आसपास सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। ऐसा बहुत कम ही होता है, किसी अजनबी व्यक्ति को देखकर या किसी जानकारी के बारे में जानकर आप नाराज़ या चिड़चिड़े महसूस करते हैं। और आप नकारात्मक ऊर्जा से घिर जाते हैं क्योंकि उस व्यक्ति या आसपास में नकारात्मक ऊर्जा का घनत्व अधिक होता है। ऐसी अनिष्ट शक्तियों में अधिक निवास करना, स्टूल सरिर की इच्छा-शक्ति, आत्मविश्वास और प्रतिरक्षा प्रणाली को पतला करनाशरीर, मन और आत्मा को अपार सकारात्मक ऊर्जा से ऊर्जावान बनाना बहुत आसान है,बस हनुमान चालीसा का जाप करें

अंग्रेजी, हिंदी, मराठी, तमिल, बंगाली, पंजाबी, तेलुगु, कन्नड़, गुजराती और नेपाली में हनुमान चालीसा

Contents

सभी भाषाओं के लिए अंग्रेजी में हनुमान चालीसा का अर्थ

हनुमान चालीसा: द एविल स्पिरिट्स एनीहिलेटर

हनुमान चालीसा का पाठ किसी भी व्यक्ति द्वारा, चाहे वह किसी भी धर्म का हो, बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करने के लिए किया जा सकता है।
पाठ करने से पहले – प्रतिदिन सुबह स्नान करें, शांत और स्वच्छ रहें, बिना कुछ खाए या छुए वायुपुत्र हनुमान के बारे में सोचें और हनुमान चालीसा का जाप करें। हनुमान चालीसा का प्रतिदिन पाठ करते हुए 40 दिनों तक ब्रह्मचर्य का अभ्यास करने से पाठ करने वाले के लिए चमत्कार होगा। और इसे दिल से आंतरिक करने में मदद करेगा।

हनुमान चालीसा: यह शक्ति किसने दी?

रावण का वध करने के बाद भगवान राम हनुमान जी के साथ अयोध्या लौट आए। जीत का जश्न मनाने के लिए युद्ध में भाग लेने वालों सहित सभी को उपहार वितरित किए गए। भगवान राम ने हनुमान से कहा कि उन्हें कुछ लेना चाहिए, बजरंगबली ने विनम्रतापूर्वक इनकार कर दिया “उन्हें कुछ नहीं चाहिए।”
वहाँ पर सीता माता उसे दिया था, मोती की maala, कीमती मोती हार उसकी गर्दन में पहनने के लिए। Anjaneya (हनुमान) बंद प्रत्येक मोती ले लिया हार और उन्हें तोड़ने शुरू कर दिया और कहा, “वह इन में राम के नाम पर नहीं मिल रहा है।” और फिर जीवन भर राम भक्ति मांगी। भगवान राम मुस्कुराए और उन्हें “चिरंजीवी बावाह” अमरता प्रदान की जिसने उन्हें कलियुग में अमर बना दिया
RamBhakt Hanuman with Bhagwan Shree Ram
. भगवान राम ने यह भी कहा, “आपने मेरे लिए जो कुछ भी किया है, हनुमान को मापा नहीं जा सकता है, इसलिए मैं आपको वरदान दे रहा हूं कि जो कोई भी मेरे नाम का पाठ करेगा, उसे भी आपके सामने झुकना होगा।”
भगवान हनुमान ने श्री राम के प्रति निःस्वार्थ भक्ति का संकल्प लिया और इसलिए वे सभी राम भक्तों की रक्षा करते हैं।
हनुमान चालीसा की रचना महान ऋषि तुलसीदास जी ने की थी, जिन्हें हनुमान जी ने व्यक्तिगत रूप से दर्शन दिए थे और उन्हें रामायण की कई घटनाओं के बारे में बताया था।
हनुमान चालीसा की रचना इस प्रकार की गई है कि प्रत्येक चौपाई में (चतुर्थांश) आपको कम से कम एक भगवान का उल्लेख मिलता है, जो इसे इतना शक्तिशाली बनाता है कि पढ़ने वाले की रक्षा स्वयं भगवान शिव के अंजनेय – रुद्र अवतार द्वारा की जाती है। भारत या विदेश में रहने वाले लाखों भारतीय हैं जिन्होंने बुरी आत्माओं को दूर भगाने, नकारात्मकता को दूर करने और सकारात्मकता उत्पन्न करने के लिए हनुमान चालीसा का जाप करने की शक्ति का अनुभव किया है। यह भारतीयों के बीच बहुत प्रसिद्ध है जो सामान्य भौतिकवादी समस्याओं – परीक्षा, साक्षात्कार, व्यवसाय और अनुबंधों पर सफलता प्राप्त करने के लिए नियमित रूप से इसका पाठ करते हैं। किसी भी प्रकार के करियर से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए, यदि इरादे अच्छे हैं और इरादे शुद्ध हैं तो कोई भी श्री हनुमान चालीसा के पाठ से सफलता प्राप्त करने से नहीं रोक सकता है।
Jai Hanuman

यद्यपि हनुमान चालीसा का उचित अनुवाद संभव नहीं है क्योंकि अशुद्ध अंग्रेजी भाषा के दूषित होने के कारण शब्दों के अर्थ बदल जाते हैं। लेकिन फिर भी वेंकटेश जी द्वारा इसका अनुवाद करने का प्रयास किया गया, ताकि अधिक से अधिक लोग हनुमान चालीसा के सार को समझ सकें और जब कोई इसे पढ़ता है तो यह कितनी शक्ति उत्पन्न करने में सक्षम होता है। आप इसे मूल हनुमान चालीसा के नीचे पाते हैं।
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Hanuman Chalisa in Awadhi Hindi Marathi

मूल हनुमान चालीसा हिंदी/मराठी/अवधी/देवनागरी में

हनुमान चालीसा हिंदी, मराठी, देवनगरी

दोहा
श्रीगुरु चरण सरोज राज ने अपने मनु मुकुरु में सुधार किया।
बरनू रघुबर बिमल जसु जो दयाकू फल चारी।
सुमीराव पवन-कुमार को नासमझ माना जाता है।
बाल बूढ़ी विद्या देहु मोहिन हरहु कालेस बीकर।
चौपाई
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
जय कपिस तिहुन लोक उजागर।
रामदूत अतमाली बाल धाम।
अंजनी-पुत्र पवनसुत नामा।
महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति की साथी।
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केस
हाथ गड़गड़ाहट और झंडा लहरा रहे हैं।
अपने कंधों को सीधा करें।
हाइब्रिड सुवान केसरीनंदन।
तेज प्रताप महा जग बंदन।
बिद्यवान गुणी बड़ा चतुर है।
राम काज करिबे करने के लिए उत्सुक।
भगवान चरित्र सुनीबे का रूस।
राम लखन सीता मन बसिया ॥८॥
सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा ।
बिकट रूप धरि लङ्क जरावा ॥९॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥१०॥
लाय सञ्जीवन लखन जियाये ।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये ॥११॥
रघुपति कीह्नी बहुत बड़ाई ।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई ॥१२॥
सहस बदन तुह्मारो जस गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥१३॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा ।
नारद सारद सहित अहीसा ॥१४॥
जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते ।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते ॥१५॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना ।
राम मिलाय राज पद दीह्ना ॥१६॥
तुह्मरो मन्त्र बिभीषन माना ।
लङ्केस्वर भए सब जग जाना ॥१७॥
जुग सहस्र जोजन पर भानु ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥१८॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं ॥१९॥
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुह्मरे तेते ॥२०॥
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिनु पैसारे ॥२१॥
सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥२२॥
आपन तेज सह्मारो आपै ।
तीनों लोक हाँक तें काँपै ॥२३॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥२४॥
नासै रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥२५॥
सङ्कट तें हनुमान छुड़ावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥२६॥
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिन के काज सकल तुम साजा ॥२७॥
और मनोरथ जो कोई लावै ।
सोई अमित जीवन फल पावै ॥२८॥
चारों जुग परताप तुह्मारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥२९॥
साधु सन्त के तुम रखवारे ।
असुर निकन्दन राम दुलारे ॥३०॥
अष्टसिद्धि नौ निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥३१॥
राम रसायन तुह्मरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥३२॥
तुह्मरे भजन राम को पावै ।
जनम जनम के दुख बिसरावै ॥३३॥
अन्त काल रघुबर पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥३४॥
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्ब सुख करई ॥३५॥
सङ्कट कटै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ॥३६॥
जय जय जय हनुमान गोसाईं ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाईं ॥३७॥
जो सत बार पाठ कर कोई ।
छूटहि बन्दि महा सुख होई ॥३८॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥३९॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा।
किजई नाथ हृदय महान डेरा 40.
दोहा
पवन्तन्य संकट हरण मंगल मूर्ति रूप।
राम लखन सीता साहित हृदय बसु सुर भूप।
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रोमन हिंदी हिंग्लिश में हनुमान चालीसा

श्री हनुमान चालीसा – अनुवाद और अर्थ के साथ रोमन हिंदी/हिंदीकृत अंग्रेजी

हनुमान चालीसा अंग्रेजी में

Hanuman Ji is Alive and Rescues Whoever Takes His name, provided he or she completely believes in him and think of him as a Ram Bhakt Hanuman
Doha

Shree Guru Charan Saroj Raj, Nij Man Mukar Sudhari,
Barnau Raghuvar Bimal Jasu, Jo dayaku Phal Chari
I am cleaning the mirror that is my mind with the dust from the feet of Gurudeva and I am now beginning the praise of Bhagwan Ram who has given me four fruits – righteous path, money earned through noble means, happiness and freedom from worldly attachments.
Budhi heen Tanu Janike, Sumirow Pavan Kumar,
Bal Buddhi Vidya Dehu Mohi, Harahu Kalesh Bikaar
My knowledge is limited Oh, son of Vayu ! I meditate upon you ! Bestow me with strength, intelligence,true realisation.Release me from all the miseries in life, O hanuman !
Chaupai
Jai Hanuman Gyan Guna Sagar
Jai Kapis Tihun Lok Ujagaar
Victory to Hanuman – the ocean of wisdom and virtue; Victory to the idol of vanars who is well known in all the three worlds.
Ramdoot Atulit Bal Dhamaa,
Anjani Putra Pavansut naamaa.
Oh, the messenger of Bhagwan Ram – you are the repository of immeasurable strength, you are the son of the great woman Anjanai – you are also known as the son of the wind.
Mahabeer Bikram Bajrangi,
Kumati Nivaar Sumati Ke Sangi.
You are valiant and brave, with immense physical strength.You drive away evil thoughts. You are a companion of good and noble thoughts.
Kanchan Baran Biraaj Subesaa,
Kanan kundal kunchit kesa.
Bhagwan Hanuman’s physique is golden colored. He wears a pretty dress and is wearing ear-rings that have matchless brilliance.His hair is wavy and beautiful.
Hath Bajra Aur Dhvaja Birajei,
Kandhe Moonj Janeu saajai.
Hanumanji is holding a lighting bolt in one hand and a banner in the other ; a sacred thread is dangling from his shoulder  
Shankar Suvana Kesari Nandan,
Tej Pratap Maha Jag Vandan.
Hanumanji is a form of God Shiva ; The world bows down in front of your tejas (brilliance/effulgence) and courage. Anjaneya Hanuman’s biological father is Kesari – who was leader of the vanar sena. Vayu Bhagwan is Hanumanji’s spiritual father.
Vidyavaan Guni Ati Chatur,
Ram Kaj Karibe Ko Atur
Hanuman- the intelligent being with a noble character and a sharp intellect is forever waiting to serve Bhagwan Ram.
Prabhu Charittra Sunibe Ko Rasiya,
Ram Lakhan Sita man basiya.
You delight in listening to the glory of Bhagwan Ram through details about Sri Ram’s life story and character sketch. You forever dwell in the hearts of Shri Ram-Sita and Shri  Lakshman.
Sukshma roop Dhari Siyahi Dikhawa,
Bikat roop Dhari Lank Jarawa
While appearing before Sita Maiiya you appeared in a diminutive form  but when you set Lanka on fire, you assumed a dreadful form.
Bhim roop Dhari Asur Sanhare,
Ramchandra Ke kaaj Savare.
Assuming a gigantic form, you decimated all the demons ! In doing so, you fulfilled the wish of Bhagwan Sri ram.
Hanuman JI with Sanjeevani Buti : Laxman to Conciousness
Laye Sajivan Lakhan Jiyaye,
Shri Raghubir harashi ur laye.
O Hanuman ! When you revived Lakshman back to Life using the magical Sanjeevani herb by carrying the entire mountain , how Bhagwan Ram embraced you with so much happiness !  
Raghupati Kinhi Bahut Badaai,
Tum Mama Priya Bharat Sam Bai.
So impressed was Bhagwan Ram with you that he praised your virtues and added that you were as dear to him as his brother Bharath.
Sahasa Badan Tumharo Yash Gaavai,
Asa kahi Shripati Kanth Laagavai.
Embracing Hanumanji, Bhagwan Sriram said – let Adisesha (the serpent with the thousand heads) sing your glory.
Sankadik Brahmadi Muneesa,
Narad Sarad Sahit Aheesa
Sages like Sanak , Devas like Brahma, the great hermit Narad and Goddess Saraswati along with Sheshnag,  the cosmic serpent,  are not able to sing the glories of Hanumanji perfectly.
Yam Kuber Digpal Jahan Te,
Kabi Kobid Kahin Sakai  Kahan Te
Yama, Kuber, poets and scholars – even they are unable to describe the glory of Hanumanji.
Tum Upkar Sugrivahi Keenha,
Ram Milai Rajpad Deenha
Hanumanji! You helped Sugriva in the nick of the time and gave back his kingdom by introducing him to Bhagwan Ram .
Tumharo Mantro Vibhishan Maana,
Lankeshwar Bhaye Sab Jag Jaana.
It is known to all that Vibhishan followed your advice and became the King Of Lanka.
Hanuman Chalisa Sun Moon Earth Distance Accurate Science of Hinduism
Yug Sahastra Yojan Par Bhaanu,
Leelyo Taahi Madhur Phal Jaanu
You gulped the SUN who was at a distance of sixteen thousand miles , THINKING it to be a sweet fruit.Prabhu Mudrika Meli Mukha Maahee,
Jaladhi Landhi Gaye Acharaj Nahee.
Carrying the Bhagwan Ram’s ring in his mouth, you crossed the ocean. This is no surprise considering you are the mighty Hanuman !
Durgam Kaj Jagat Ke Jethe
Sugam Anugrah Tumhare TeTe.
Oh Hanumanji! Your grace will pave the way for successful completion of even the toughest tasks.
Ram Duware Tum Rakhavare,
Hot Na Aagya Bin Paisare.
Oh Hanumanji! You are the sentinel at the door of Ram’s divine abode. No one can enter his abode without your permission.
Sab Sukh Lahen Tumhari Sarna,
Tum Rakshak Kaahu Ko Darnaa.
Those who surrender to you benefit immensely ! Why fear when you are the protector ?
Aapan Tej Samharo Aapei,
Tenau Lok Hank Te Kanpei
All the three worlds tremble when you roar ; only you can control your might.
Bhoot Pisaach Nikat Nahi Avei,
Mahabir Jab Naam Sunavei.
The Ghosts, Demons & evil spirits dare not come near your  
devotees.
RamBhakt Hanuman Ji Killing Evil Spirits, Demons, Rakshas
Nashai Rog Harai Sab Peera,
Japat Niranter Hanumat Beera
Disease and difficulties vanish when your name is chanted incessantly !
Sankat Se Hanuman Chhudavei,
Man Kram Bachan Dhyan Jo Lavei.
Those who remember Hanumanji in thought, word and deed are freed from their troubles.
Sab par Ram Tapasvee Raja
Tinke Kaaj Sakal Tum Saaja
Bhagwan Ram blesses those who seek his grace and you are fulfilling the commands of Sri Ram sincerely.
Aur Manorath Jo Koi Lavai,
Tasu Amit Jivan Phal Pavai
Desires of devotees are fulfilled by you  and they benefit from the eternal grace of the Bhagwan.  
Charo Yug Partap Tumhara,
Hai Parasiddha Jagat Ujiyara.
The name of Hanuman is known across the Universe ; Your glory is being sung in all the four yugs – namely Satya, Thretha, Dwabar, Kali.
Sadhu Sant Ke Tum Rakhvare,
Asur Nikandan Ram Dulare.
Oh Hanumanji! O, guardian angel of saints and sages and destroyer of all the Demons, you are the one whom Shri Ram is so fond of.
Ashta Siddhi Nawa Nidhi Ke Data,
Asa Bar Din Janki Mata.
Hanumanji – you have been  blessed with mother Janki  that you may bestow to those who pray to you, eight types of Sidhis and nine kinds of funds .
Ram Rasayan Tumhare Pasa,
Sadaa Raho Raghupati Ke Dasa.
Forever a servant of Sri Ram, the essence of devotion to Ram lies within you.
Tumhare Bhajan Ramko Paavai
Janam Janam Ke Dukh Bisravei.
The sufferings of several past births are wiped out by praying to you, Hanuman. A hymn sung in your praise pleases Bhagwan Ram.
Anta Kaal Raghupati Pur Jai,
Jahan Janmi  Hari Bhakta Kahai.
 
After death he enters the eternal abode of Sri Ram and remains his devotee Whenever he  takes birth on earth.
Aur Devata Chitt Na Dharai,
Hanumant Sei Sarva Sukh Karai
Praying to Hanumanji alone will give all happiness.
Sankat Hare Mitey Sab Peera,
Jo Sumirei Hanumant Balbeera
You end the sufferings, sorrows and remove all the pain from those who remember you.
Jai Jai Jai Hanuman Gosai
Kripa Karahu Gurudev Ki Naiee
Hail-Hail-Hail-Bhagwan Hanumanji! I beseech you to bless me in the capacity of my supreme ‘GURU’ (teacher).
Jo Sat Baar Paath Kar Joi,
Chhutahi Bandi Maha Sukh Hoi.
Anyone who recites this Hanuman Chalisa one hundred times daily is free from the bondage of life and death and enjoys the highest  bliss at last.
Jo Yah Padhe Hanuman Chalisa,
Hoy Siddhi Sakhi Gaurisa
Those who recite the Hanuman Chalisa, will be showered with grace by Bhagwan Shiv.
Tulsidas Sada Hari Chera,
Keeje Nath Hriday Mah Dera
Tulsidas , always the servant of Hari (Avatar of Vishnu, Ram was also avatar of Bhagwan Vishnu) prays. “Oh my Bhagwan! May you reside in my heart forever !
Doha
Pavanathanai Sankatharan, mangala murthi roop
Ram Lakhan Seeta Sahith, Hriday basahu Surbhoop.
Hanuman – the son of Vayu, the one who removes all obstacles and the one who has an auspicious form – Let Hanuman reside in my heart along with Sri Ram, Lakshman and Sita
जो कोई भी हनुमान चालीसा की शक्ति का अनुभव करना चाहता है, वह स्नान करके, स्वयं को स्वच्छ रखकर और फिर समग्र रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करके इसे महसूस कर सकता है।
Hanuman Chalisa in Bengali

বাংলায় হনুমান চালিসা

হনুমান চালিশা বেঙ্গালি

দোহা
শ্রী গুরু চরণ সরোজ রজ নিজমন মুকুর সুধারি |
বরণৌ রঘুবর বিমলযশ জো দাযক ফলচারি ||
বুদ্ধিহীন তনুজানিকৈ সুমিরৌ পবন কুমার |
বল বুদ্ধি বিদ্যা দেহু মোহি হরহু কলেশ বিকার্ ||
ধ্যানম্
গোষ্পদীকৃত বারাশিং মশকীকৃত রাক্ষসম্ |
রামাযণ মহামালা রত্নং বংদে অনিলাত্মজম্ ||
যত্র যত্র রঘুনাথ কীর্তনং তত্র তত্র কৃতমস্তকাংজলিম্ |
ভাষ্পবারি পরিপূর্ণ লোচনং মারুতিং নমত রাক্ষসাংতকম্ ||
চৌপাঈ
জয হনুমান জ্ঞান গুণ সাগর |
জয কপীশ তিহু লোক উজাগর || 1 ||
রামদূত অতুলিত বলধামা |
অংজনি পুত্র পবনসুত নামা || 2 ||
মহাবীর বিক্রম বজরংগী |
কুমতি নিবার সুমতি কে সংগী ||3 ||
কংচন বরণ বিরাজ সুবেশা |
কানন কুংডল কুংচিত কেশা || 4 ||
হাথবজ্র ঔ ধ্বজা বিরাজৈ |
কাংথে মূংজ জনেবূ সাজৈ || 5||
শংকর সুবন কেসরী নংদন |
তেজ প্রতাপ মহাজগ বংদন || 6 ||
বিদ্যাবান গুণী অতি চাতুর |
রাম কাজ করিবে কো আতুর || 7 ||
প্রভু চরিত্র সুনিবে কো রসিযা |
রামলখন সীতা মন বসিযা || 8||
সূক্ষ্ম রূপধরি সিযহি দিখাবা |
বিকট রূপধরি লংক জরাবা || 9 ||
ভীম রূপধরি অসুর সংহারে |
রামচংদ্র কে কাজ সংবারে || 10 ||
লায সংজীবন লখন জিযাযে |
শ্রী রঘুবীর হরষি উরলাযে || 11 ||
রঘুপতি কীন্হী বহুত বডাযী |
তুম মম প্রিয ভরতহি সম ভাযী || 12 ||
সহস বদন তুম্হরো যশগাবৈ |
অস কহি শ্রীপতি কংঠ লগাবৈ || 13 ||
সনকাদিক ব্রহ্মাদি মুনীশা |
নারদ শারদ সহিত অহীশা || 14 ||
যম কুবের দিগপাল জহাং তে |
কবি কোবিদ কহি সকে কহাং তে || 15 ||
তুম উপকার সুগ্রীবহি কীন্হা |
রাম মিলায রাজপদ দীন্হা || 16 ||
তুম্হরো মংত্র বিভীষণ মানা |
লংকেশ্বর ভযে সব জগ জানা || 17 ||
যুগ সহস্র যোজন পর ভানূ |
লীল্যো তাহি মধুর ফল জানূ || 18 ||
প্রভু মুদ্রিকা মেলি মুখ মাহী |
জলধি লাংঘি গযে অচরজ নাহী || 19 ||
দুর্গম কাজ জগত কে জেতে |
সুগম অনুগ্রহ তুম্হরে তেতে || 20 ||
রাম দুআরে তুম রখবারে |
হোত ন আজ্ঞা বিনু পৈসারে || 21 ||
সব সুখ লহৈ তুম্হারী শরণা |
তুম রক্ষক কাহূ কো ডর না || 22 ||
আপন তেজ তুম্হারো আপৈ |
তীনোং লোক হাংক তে কাংপৈ || 23 ||
ভূত পিশাচ নিকট নহি আবৈ |
মহবীর জব নাম সুনাবৈ || 24 ||
নাসৈ রোগ হরৈ সব পীরা |
জপত নিরংতর হনুমত বীরা || 25 ||
সংকট সেং হনুমান ছুডাবৈ |
মন ক্রম বচন ধ্যান জো লাবৈ || 26 ||
সব পর রাম তপস্বী রাজা |
তিনকে কাজ সকল তুম সাজা || 27 ||
ঔর মনোরধ জো কোযি লাবৈ |
তাসু অমিত জীবন ফল পাবৈ || 28 ||
চারো যুগ পরিতাপ তুম্হারা |
হৈ পরসিদ্ধ জগত উজিযারা || 29 ||
সাধু সংত কে তুম রখবারে |
অসুর নিকংদন রাম দুলারে || 30 ||
অষ্ঠসিদ্ধি নব নিধি কে দাতা |
অস বর দীন্হ জানকী মাতা || 31 ||
রাম রসাযন তুম্হারে পাসা |
সাদ রহো রঘুপতি কে দাসা || 32 ||
তুম্হরে ভজন রামকো পাবৈ |
জন্ম জন্ম কে দুখ বিসরাবৈ || 33 ||
অংত কাল রঘুবর পুরজাযী |
জহাং জন্ম হরিভক্ত কহাযী || 34 ||
ঔর দেবতা চিত্ত ন ধরযী |
হনুমত সেযি সর্ব সুখ করযী || 35 ||
সংকট কটৈ মিটৈ সব পীরা |
জো সুমিরৈ হনুমত বল বীরা || 36 ||
জৈ জৈ জৈ হনুমান গোসাযী |
কৃপা করো গুরুদেব কী নাযী || 37 ||
জো শত বার পাঠ কর কোযী |
ছূটহি বংদি মহা সুখ হোযী || 38 ||
জো যহ পডৈ হনুমান চালীসা |
হোয সিদ্ধি সাখী গৌরীশা || 39 ||
তুলসীদাস সদা হরি চেরা |
কীজৈ নাথ হৃদয মহ ডেরা || 40 ||
দোহা
পবন তনয সংকট হরণ – মংগল মূরতি রূপ্ |
রাম লখন সীতা সহিত – হৃদয বসহু সুরভূপ্ ||
সিযাবর রামচংদ্রকী জয | পবনসুত হনুমানকী জয | বোলো ভাযী সব সংতনকী জয |
Hanuman Chalisa in Tamil

தமிழில் அனுமன் சாலிசா

அனுமன் சாலிசா தமிழ்

ஸ்ரீகுரு சரண் ஸரோஜ்ரஜ் நிஜ மன முகுர ஸுதார் பரணோம் ரகுவர விமல யச ஜோ தாயக பலசார்
எனது மனம் என்னும் கண்ணாடியை ஸ்ரீ குருதேவரின் திருப்பாதத் தூசியால் தூய்மைப் படுத்திக் கொண்டு நான்கு கனிகளைத் தருகின்ற ரகுகுலதிலகமான ஸ்ரீராமனின் மாசற்ற தெய்வீகப் பெருமைகளை விளக்கத் தொடங்குகிறேன்.
புத்தி ஹீன தனு ஜானி கே ஸுமிரௌ பவன குமார் பல புத்தி வித்யா தேஹு மோஹிம் ஹரஹு கலேச விகார்
எனது அறிவோ குறுகியது வாயு மைந்தனான ஆஞ்சநேயா உன்னைத் தியானிக்கிறேன் எனக்கு வலிமை அறிவு உண்மை ஞானம் எல்லாம் தருவாய். என்னைத் துன்பங்களிலிருந்தும் தவறுகளிலிருந்தும் விடுவிப்பாய்.
1. ஜய ஹனுமான் ஜ்ஞான குண ஸாகர ஜய கபீஸ திஹுலோக உஜாகர
ஆஞ்சநேயா நீ கடலைப் போலப் பரந்த அறிவும் நற்குணங்களும் பொருந்தியவன் வானரர்களின் தலைவன் மூன்று உலகங்களையும் உணர்வுற்றெழச் செய்பவன். உனக்கு வெற்றி உண்டாகட்டும்.
2. ராமதூத அதுலித பலதாமா அஞ்ஜனி புத்ர பவன ஸுத நாமா
நீ ஸ்ரீராம தூதன் எல்லையற்ற ஆற்றலின் உறைவிடம் அஞ்ஜனையின் மைந்தன் வாயுபுத்திரன் என்னும் பெயர்பெற்றவன்.
3. மஹாவீர் விக்ரம பஜரங்கீ குமதி நிவார ஸுமதி கே ஸங்கீ
மிகுந்த ஆற்றல் வாய்ந்த உடலுடன் இணையற்ற வலிமை பொருந்திய வீரன் நீ. துய சிந்தனைகளை விரட்டுபவன் நீ. நல்லசிந்தனைகளின் நண்பன் நீ.
4. கஞ்சன பரண விராஜ ஸுவேசா கானன குண்டல குஞ்சித கேசா
பொன்னிறம் பொருந்தியவன் நீ சிறந்த ஆடைகளை உடுத்தியுள்ளவன் நீ. ஒளி வீசுகின்ற குண்டலங்களையும் காதில் அணிந்துள்ளாய். உனது முடியோ அலையலையாக அழகாக உள்ளது.
5. ஹாத் வஜ்ர ஒள த்வஜா விராஜை காந்தே மூஞ்ஜ ஜனேவூ ஸாஜை
உனது கைகளை இடியும் கொடியும் அலங்கரிக்கின்றன. தோளையோ முஞ்ஜைப் புல்லாலான பூணூல் அணி செய்கிறது.
6. சங்கர ஸுவன கேசரீ நந்தன தேஜ ப்ரதாப மஹா ஜகவந்தன
நீ சிவபெருமானின் அவதாரம் கேசரியின் மகன் உனது தேஜசையும் வீரத்தையும் கண்டு உலகமே உன்னை வணங்குகிறது. அனுமனின் தந்தை கேசரி என்னும் வானரர் தலைவர். சிங்கத்தைப் போன்ற ஆற்றல் உடையவராக இருந்ததால் அவர் கேசரி என்னும் பெயர் பெற்றார். அனுமனின் தெய்வீகத் தந்தை வாயு பகவான்.
7. வித்யாவான் குணீ அதி சாதுர ராம காஜ கரிபே கோ ஆதுர
நீ அறிவாளி நற்குணங்கள் நிரம்பப் பெற்றவன் மிகவும் கூரிய புத்தியை உடையவன் ஸ்ரீராமனின் பணிக்காக எப்போதும் மகிழ்ச்சியுடன் காத்திருப்பவன்.
8. ப்ரபு சரித்ர ஸுனிபே கோ ரஸியா ராம லக்ஷமண ஸுதா மன பஸியா
இறைவன் திருப்புகழையும் பெருமையையும் கேட்பதில் நீ எப்போதும் பரவசம் கொள்கிறாய். ஸ்ரீராமனும் லட்சுமணனும் சீதையும் உனது மனத்தில் குடியிருக்கின்றனர்.
9. ஸூக்ஷ்ம ரூபதரி ஸியஹிம் திக்காவா விகட ரூப தரி லங்க ஜராவா
நீ மிகவும் நுண்ணிய உருவில் சீதையின் முன் வெளிப்பட்டாய் மிகவும் பயங்கார உருக்கொண்டு இலங்கையைக் கொளுத்தினாய்.
10. பீம ரூபதரி அஸுர ஸம்ஹாரே ராமசந்த்ர கே காஜ் ஸவாரே
மிகவும் பெரிய உருவம் கொண்டு அரக்கர்களை அழித்து ஸ்ரீராம காரியத்தை நிறைவேற்றினாய்.
11. லாய ஸஜீவன் லஷன ஜியாயே ஸ்ரீ ரகுவீர ஹரஷி உர லாயே
சஞ்சீவினி மூலிகையைக் கொண்டு வந்து லட்சுமணனின் உயிரைக் காத்த போது ஸ்ரீராமன் உன்னை எத்தனை ஆனந்தத்துடன் தழுவிக் கொண்டார்!
12. ரகுபதி கீனி பஹுத் படாயீ தும் மம ப்ரிய ஹி பரதஸம பாயீ
ஸ்ரீராமன் உனது பெருமைகளை மிகவும் புகழ்ந்து நீயும் பரதனைப் போலவே தமக்குப் பிரியமானவன் என்று கூறியருளினார்.
13. ஸஹஸ வதன தும்ஹரோ யச காவைம் அஸ கஹி ஸ்ரீபதி கண்ட லகாவைம்
ஆயிரம் தலைகள் கொண்ட ஆதிசேஷன் கூட உனது பெருமைகளைப் புகழ்வதாக ஸ்ரீராமன் உன்னை அணைத்தபடியே கூறினார்.
14. ஸனகாதிக ப்ரஹ்மாதி முனீசா நாரத சாரத ஸஹித அஹீசா
ஸனகர் முதலான முனிவர்கள் பிரம்மா போன்ற தேவர்கள் சிவபெருமான் நாரதர் கலைமகள் ஆதிசேஷன்.
15. யம குபேர திகபால ஜஹாம் தே கவி கோவித கஹி ஸகைம் கஹாம் தே
எமன் குபேரன் திரைக் காவலர்கள் கவிஞர்கள் புலவர்கள் எல்லோரும் உனது பெருமைகளை விளக்க முயன்று தோல்வியே கண்டார்கள்.
16. தும் உபகார ஸுக்ரீ வஹிம் கீன்ஹா ராம மிலாய ராஜபத தீன்ஹா
ஸ்ரீராமனிடம் அறிமுகப்படுத்தி சொந்த அரசை மீட்டுக்கொடுத்ததன் மூலம் நீ சுக்ரீவனுக்கு ஓர் இணையற்ற உதவியைச் செய்து விட்டாய்.
17. தும்ஹரோ மந்த்ர விபீஷண மானா லங்கேச்வர பயே ஸப் ஜக ஜானா
உனது அறிவுரைகளின்படி நடந்ததாலேயே விபீஷணன் இலங்கை அரசனானான் என்பது உலகம் முழுவதும் தெரிந்த விஷயம்.
18. யுக ஸஹஸ்ர யோஜன பர பானூ லீல்யோ தாஹி மதுர பல ஜானூ
பதினாறாயிரம் மைல்களுக்கு அப்பாலிருந்த சூரியனை கனியென எண்ணி நீ விழுங்கிவிட்டாய்.
19. ப்ரபு முத்ரிகா மேலி முக மாஹீம் ஜலதி லாந்தி கயே அசரஜ் நாஹீம்
ஸ்ரீராமனின் முத்திரை மோதிரத்தை வாயில் தங்கியபடியே நீ கடலைக் கடந்துவிட்டாய். (உனது அளப்பரிய ஆற்றல்களைக் கணக்கிடும் போது) இது ஒன்றும் வியப்பிற்குரியதல்ல.
20. துர்கம காஜ் ஜகத் கே ஜேதே ஸுகம அனுக்ரஹ தும்ஹரே தேதே
எத்தனைக் கடினமான செயலும் உனதருளால் எளிதல் நிறைவேறிவிடும்.
21. ராம துவாரே தும் ரக்வாரே ஹோத ந ஆஜ்ஞா பின பைஸாரே
ஸ்ரீராம ராஜ்யத்தின் வாயிற் காவலன் நீ. உனது அனுமதியின்றி அங்கு யாரும் நுழைய முடியாது.
22. ஸப் ஸுக லஹை தும்ஹாரீ ஸரனா தும் ரக்ஷக காஹூ கோ டர்னா
உன்னைச் சரணடைபவர்கள் எல்லா இன்பங்களையும் பெறுகின்றார்கள். நீ பாதுகாவலனாக இருக்கும் போது எதற்காகப் பயப்பட வேண்டும்.
23. ஆபன் தேஜ் ஸம்ஹாரௌ ஆபை தீனோம் லோக ஹாங்க்தே காம்பை
உனது ஆற்றலைக் கட்டுபடுத்த உன்னால் மட்டுமே முடியும். உனது ஆற்றலின் முன் மூன்று உலகங்களும் நடுங்குகின்றன.
24. பூத பிசாச நிகட நஹிம் ஆவை மஹாவீர ஜப் நாம ஸுனாவை
மகாவீரன் என்னும் உனது திருநாமத்தை இடைவிடாது கூறினால் நோய் அகல்கிறது துன்பம் விலகுகிறது.
25. நாசை ரோக் ஹரை ஸப் பீரா ஜபத நிரந்தர ஹனுமத் வீரா
உனது ஆற்றல் மிக்கத் திருநாமத்தை இடைவிடாது கூறினால் நோய் அகல்கிறது துன்பம் விலகுகின்றது. மனோ தைரியம் உண்டாகின்றது.
26. ஸங்கட ஸே ஹனுமான் சோடாவை மன க்ரம வசனத்யான ஜோ லாவை
மனம் வாக்கு செயலால் அனுமனைத் தியானிக்கும் ஒருவனை அவர் எல்லாத் துன்பங்களிலிருந்தும் விடுவிக்கிறார்.
27. ஸப் பர் ராம் தபஸ்வீ ராஜா தின்கே காஜ் ஸகல தும் ஸாஜா
தவம் புரிகின்ற பக்தர்களின் மேலான ஆசைகளை நிறைவேற்றுகின்ற ஸ்ரீராமனின் பணிகளை நீ நிறைவேற்றினாய்.
28. ஒளர் மனோரத ஜோ கோயி லாவை தாஸு அமித ஜீவன் பல பாவை
மேலும் பக்தனின் ஆசைகளை நிறைவேறுவதுடன் அவன் அழியாக்கனியாகிய இறையனுபூபதியையும் பெறுகிறான்.
29. சாரஹு யுக பரதாப தும்ஹாரா ஹை பரஸித்த ஜகத உஜியாரா
சத்திய திரேதா துவாபர கலி என்னும் நான்கு யுகங்களிலும் உனது பெருமை போற்றப்படுகிறது. உனது திருநாமம் உலகம் முழுவதும் சிறக்கிறது.
30. ஸாது ஸந்த கே தும் ரக்வாரே அஸுர நிகந்தன ராம துலாரே
நல்லோரையும் ஞானியரையும் நீயே காக்கிறாய். ஸ்ரீராமனின் மனத்துக்கு உகந்தவனான நீயே தீய சக்திகளை அழிக்கிறாய்.
31. அஷ்ட ஸித்தி நவ நிதி கே தாதா அஸ் வர தீன் ஜானகீ மாதா
எட்டுவித சித்திகளையும் ஒன்பதுவிதச் செல்வங்களையும் கேட்பவருக்கு அளிக்கம் ஆற்றலை சீதா தேவி உனக்கு அருளினாள்.
32. ராம் ரஸாயள தும்ஹரே பாஸா ஸதா ரஹெள ரகுபதி கே தாஸா
ஸ்ரீராம பக்தி என்பதன் சாரமே உன்னிடம் உள்ளது. எப்போதும் நீ அவரது சேவகனாகவே இருப்பாய்.
33. தும்ஹரே பஜன் ராம்கோ பாவை ஜன்ம ஜன்ம கே துக்க பிஸராவை
உன்னிடம் பக்தி கொள்வதால் ஒருவன் ஸ்ரீராமனை அடைகிறான். எத்தனையோ பிறவிகளில் தொடர்ந்து வந்த துன்பங்கள் அவனை விட்டு அகல்கின்றன.
34. அந்த கால ரகுபதி புர ஜாயீ ஜஹாம் ஜன்மி ஹரிபக்த கஹாயீ
அவன் தன் வாழ்வின் முடிவில் ஸ்ரீராமனின் உறைவிடம் செல்கிறான். அங்கு அவன் ஹரி பக்தனாக மதிக்கப்படுகிறான்.
35. ஒளர் தேவதா சித்த ந தரயீ ஹனுமத் ஸேயி ஸர்வ ஸுக கரயீ
அனுமனைத் தவிர வேறு எந்தத் தெய்வத்திடமும் மனத்தைச் செலுத்தாத ஒருவனுக்கும் எல்லா இன்பங்களும் நிறைகின்றன.
36. ஸங்கட ஹரை மிடை ஸப் பீரா ஜோ ஸுமிரை ஹனுமத பல பீரா
எல்லாம் வல்ல ஆஞ்சநேயரை நினைப்பவரின் துன்பங்களும் துயரங்களும் விலகி ஓடுகின்றன.
37. ஜய் ஜய் ஜய் ஹனுமான் கோஸாயீ க்ருபா கரஹு குருதேவ கீ நாயீ
ஓ ஆஞ்சநேயா உனக்கு வெற்றி வெற்றி வெற்றி உண்டாகட்டும். ஓ பரம குருவே எங்களுக்கு அருள்புரிவீர்களாக.
38. ஜோ சத பார் பாட கர ஜோயீ சூடஹி பந்தி மஹாஸுக ஹோயீ
இந்தத் துதிகளை நூறு முறை பக்தியுடன் படிப்பவர்களுக்கு உலகத்தளைகள் எல்லாம் நீங்கப் பெற்று பரமானந்தத்தை அனுபவிக்கின்றனர்.
39. ஜோ யஹ் படை ஹனுமான் சாலீஸா ஹோய் ஸித்தி ஸாகீ கௌரீஸா
இந்த ஹனுமான் சாலீஸாவைப் படிப்பவர்களுக்கு சிவபெருமான் அருள் புரிகிறார் அவன் பரிபூரண நிலையை அடைகின்றனர்.
40. துளஸீதாஸ ஸதா ஹரி சேரா கீஜை நாத ஹ்ருதய மஹ டேரா
என்றென்றும் தம் இதயத்தில் இறைவன் எழுந்தருளி வாழட்டும் என்று அவரது நித்திய சேவகனான துளஸுதாசன் பிரார்த்திக்கிறான்.
பவன தனய ஸங்கட ஹரன் மங்கள மூரதி ரூப ராமலஷமன் ஸீதா ஸஹித ஹ்ருதய பஸஹு ஸுரபூப
துன்பங்களைப் போக்குபவனுக்கு மங்கள உருவினனும் தேவர்களின் தலைவனும் வாயு மைந்தனும் ஆகிய ஸ்ரீ ஆஞ்சநேயர் எனது இதயத்தில் ஸ்ரீராம லட்சுமண சீதையுடன் நிலவட்டும்.
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હનુમાન ચાલીસા ગુજરાતીમાં

હનુમાન ચાલીસા ગુજરાતી

શ્રી ગુરુ ચારણ સરોજ રાજ નિજ મનુ મુકુર સુધારી ।
બારણું બિમલ જાસુ જો દાયકુ ફળ ચારી ॥
બુદ્ધિ હીન તહુ જાનિકે સુમેરોઃ પવન કુમાર ।
બળ બુદ્ધિ બીડ્યા દેઉ મોહી કરાયુ કલેસ બિકાર ॥
॥ ચૌપાઈ ॥
જાય હનુમાન જ્ઞાન ગુન સાગર ।
જાય કપીસ તિહું લોક ઉજાગર ॥०१॥
રામ દૂત અતુલિત બળ ધામા ।
અંજની પુત્ર પવન સુત નામા ॥०२॥
મહાબીર બિક્રમ બજરંગી ।
કુમતિ નિવાર સુમતિ કે સંગી ॥०३॥
કંચન બરન બિરાજ સુબેસા ।
કાનન કુંડળ કુંચિત કેસા ॥०४॥
હાત બજ્ર ઔર ધ્વજા બિરાજે ।
કાંધે મુંજ જનેઉ સાંજે ॥०५॥
સંકર સુવન કેસરી નંદન ।
તેજ પ્રતાપ મહા જગ બંદન ॥०६॥
બીડ્યાંબાન ગુણી અતિ ચતુર ।
રામ કાજ કરિબે કો આતુર ॥०७॥
પ્રભુ ચરિત્ર સુનિબે કો રસિયા ।
રામ લખન સીતા મન બસિયા ॥०८॥
સૂક્ષ્મ રૂપ ધરી સિયહિ દિખાવા ।
બિકટ રૂપ ધારી લંક જરાવા ॥०९॥
ભીમ રૂપ ધરી અસુર સહારે ।
રામચંદ્ર કે કાજ સવારે ॥१०॥
લાયે સંજીવન લખન જિયાયે ।
શ્રી રઘુબીર હરષિ ઉર લાયે ॥११॥
રઘુપતિ કીન્હી બહુત બધાયે ।
તુમ મમ પ્રિયઃ ભારત સમ ભાઈ ॥१२॥
સહસ બદન તુમ્હરો જસ ગાવે ।
અસ કહી શ્રીપતિ કંઠ લગાવે ॥१३॥
સનકાદિક બ્રમ્હાદિ મુનીસા ।
નારદ સરળ સહીત અહીસા ॥१४॥
જામ કુબેર દિગપાલ જાહાંતે ।
કબી કોબિન્ધ કહી સખે કહાંતે ॥१५॥
તુમ ઉપકાર સુગ્રીવહિં કીન્હા ।
રામ મિલાય રાજ પદ દીન્હા ॥१६॥
તુમ્હરો મંત્ર વિભીષણ માના ।
લંકે સ્વર ભય સબ જગ જાના ॥१७॥
જગ સહસ્ત્ર જોજન પાર ભાનુ ।
લીલ્યો તાહી મધુર ફળ જાણું ॥१८॥
પ્રભુ મુદ્રિકા મૈલી મુખ માહી ।
જલ્દી લાગી ગયે અચરજ નાહી ॥१९॥
દુર્ગમ કાજ જગત કે જેતે ।
સુગમ અનુગ્રહ તુમ્હરે તેતે ॥२०॥
રામ દુઆરે તુમ રખવારે ।
હોત ન અડયના બેનું પૈસારે ॥२१॥
સબ સુખ લહે તુમ્હારી સરના ।
તુમ રાકચક કહું કો દરના ॥२२॥
આપન તેજ સમ્હારો આપે ।
ટીનો લોક હાંક તેહ કાપે ॥२३॥
ભૂત પિશાચય નિકટ નહિ આવે ।
મહાબીર જબ નામ સુનાવે ॥२४॥
નાસે રોગ હરે સબ પીર ।
જપ્ત નિરંતર હનુમત બિરા ॥२५॥
સંકટ તેહ હનુમાન છુડાવે ।
મન ક્રમ બચન ધ્યાન જબ લાવે ॥२६॥
સબ પાર રામ પપસ્વી રાજા ।
ટીન કે કાજ સકલ તુમ સઝા ॥२७॥
ઔર મનોરથ જો કોઈ લાવે ।
સોઈ અમિત જીવન ફલ પાવે ॥२८॥
ચારો જુગ પરતાપ તુમ્હારા ।
હૈ પરસિદ્ધ જગત ઉજિયારા ॥२९॥
સાધુ સંત કે તુમ રખવારે ।
અસુર નિકાનંદન રામ દુલારે ॥३०॥
અષ્ટ સીધી નવ નિધિ કે દાતા ।
અસ બર દિન જાનકી માતા ॥३१॥
રામ રસાયન તુમ્હારે પાસા ।
સદા રહો રઘુપતિ કે દાસા ॥३२॥
તુમ્હરે ભજન રામ કો પાવે ।
જન્મ જન્મ કે દુખ બિસરાવે ॥३३॥
અંત કાળ રઘુબર પૂર જાયી ।
જહાં જન્મ હરિ ભક્ત કહાયી ॥३४॥
ઔર દેવતા ચિઠ ન ધારયિ ।
હનુમત સેહી સર્બ સુખ કરયિ ॥३५॥
સંકટ કાટે મિટે સબ પેરા ।
જો સુમીરે હનુમ્ત બલબીરા ॥३६॥
જાય જાય જાય હનુમાન ગોસાઈ ।
કૃપા કરઉ ગુરુ દેવકી નઈ ॥३७॥
જો સત બાર પાઠ કર કોઈ ।
છૂટહિ બંદી મહા સુખ હોઈ ॥३८॥
જો યહ પઢે હનુમાન ચાલીસા ।
હોય સીધી સાખી ગૌરીસા ॥३९॥
તુલસીદાસ સદા હરિ ચેરા ।
કીજે નાથ હૃદય મહ ડેરા ॥४०॥
॥ દોહા ॥
પવનતનય સંકટ હરન મંગલ મૂર્તિ રૃપ ।
રામ લખન સીતા સહીત હૃદય બસઉ સુર ભૂપ ॥
॥ જાય-ઘોષ ॥
બોલ બજરંગબળી કી જય ।
પવન પુત્ર હનુમાન કી જય ॥
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પંજાબીમાં હનુમાન ચાલીસા

ਹਨੂੰਮਾਨ ਚਾਲੀਸਾ ਪੰਜਾਬੀ

ਜਯ ਹਨੁਮਾਨ ਗਿਯਾਨ ਗੁਣ ਸਾਗਰ । ਜਯ ਕਪੀਸ ਤਿਹੁੰ ਲੋਕ ਉਜਾਗਰ ।।
ਰਾਮ ਦੂਤ ਅਤੁਲਿਤ ਬਲ ਧਾਮਾ । ਅੰਜਨੀ- ਪੁਤ੍ਰ ਪਵਨ ਸੁਤ ਨਾਮਾ ।।
ਮਹਾਬੀਰ ਵਿਕ੍ਰਮ ਬਜਰੰਗੀ । ਕੁਮਤਿ ਨਿਵਾਰ ਸੁਮਤਿ ਕੇ ਸੰਗੀ ।।
ਕੰਚਨ ਬਰਨ ਬਿਰਾਜ ਸੁਬੇਸਾ । ਕਾਨਨ ਕੁੰਡਲ ਕੁੰਚਿਤ ਕੇਸਾ ।।
ਹਾਥ ਬਜ੍ਰ ਔ ਧਵਜਾ ਬਿਰਾਜੇ । ਕਾੰਧੇ ਮੂੰਜ ਜਨੇਊ ਸਾਜੇ ।।
ਸੰਕਰ ਸੁਵਨ ਕੇਸਰੀ ਨੰਦਨ । ਤੇਜ ਪ੍ਰਤਾਪ ਮਹਾ ਜਗ ਬੰਦਨ ।।
ਬਿਦਯਾਵਾਨ ਗੁਣੀ ਅਤਿ ਚਾਤਰੁ । ਰਾਮ ਕਾਜ ਕਰਿਬੇ ਕੋ ਆਤਰ ।।
ਪ੍ਰਭੁ ਚਰਿਤ੍ਰ ਸੁਨਿਬੇ ਕੋ ਰਸਿਯਾ । ਰਾਮ ਲਖਣ ਸੀਤਾ ਮਨ ਬਸਿਯਾ ।।
ਸੂਕਸ਼ਮ ਰੂਪ ਧਰਿ ਸਿਯਹਿੰ ਦਿਖਾਵਾ । ਬਿਕਟ ਰੂਪ ਧਰਿ ਲੰਕ ਜਰਾਵਾ ।।
ਭੀਮ ਰੂਪ ਧਰਿ ਅਸੁਰ ਸੰਹਾਰੇ । ਰਾਮਚੰਦ੍ਰ ਕੇ ਕਾਜ ਸੰਵਾਰੇ ।।
ਲਾਯ ਸਜੀਵਨ ਲਖਣ ਜਿਯਾਯੇ । ਸ਼੍ਰੀ ਰਘੂਬੀਰ ਹਰਸਿ ਉਰ ਲਾਯੇ ।।
ਰਘੂਪਤਿ ਕੀਨਹੀ ਬਹੁਤ ਬਢਾਈ । ਤੁਮ ਮਮ ਪ੍ਰਿਯ ਭਰਤਹਿ ਸਮ ਭਾਈ ।।
ਸਹਸ ਬਦਨ ਤੁਮ੍ਹਰੋ ਜਸ ਗਾਵੈ । ਅਸ ਕਹਿੰ ਸ਼੍ਰੀਪਤਿ ਕੰਠ ਲਗਾਵੈ ।।
ਸਨਕਾਦਿਕ ਬ੍ਰਹ੍ਮਾਦਿ ਮੁਨਿੰਸਾ । ਨਾਰਦ ਸਾਰਦ ਸਹਿਤ ਅਹੀਸਾ ।।
ਜਮ ਕੁਬੇਰਾ ਦਿਗਪਾਲ ਜਹਾ ਤੇ । ਕਬਿ ਕੋਬਿਦ ਕਹਿ ਸਕੇ ਕਹਾ ਤੇ ।।
ਤੁਮ ਉਪਕਾਰ ਸੁਗ੍ਰੀਵਹਿੰ ਕੀਨਹਾ । ਰਾਮ ਮਿਲਾਦੇ ਰਾਜ ਪਦ ਦੀਨਹਾ ।।
ਤੁਮ੍ਹਰੋ ਮੰਤ੍ਰ ਬਿਭੀਸ਼ਣ ਮਾਨਾ । ਲੰਕੇਸ਼੍ਰਰ ਭਯੇ ਸਬ ਜਗ ਜਾਨਾ ।।
ਜੁਗ ਸਹਸਤ੍ਰ ਜੋਜਨ ਪਰ ਭਾਨੁ । ਲੀਲਯੋ ਤਹਿ ਮਧੁਰ ਫਲ ਜਾਨੁ ।।
ਪ੍ਰਭੁ ਮੁਦ੍ਰਿਕਾ ਮੇਲਿ ਮੁਖ ਮਾਹੀਂ । ਜਲਧਿਲਾਂਘਿ ਗਯੇ ਅਚਰਜ ਨਾਹੀਂ ।।
ਦੁਰ੍ਗਮ ਕਾਜ ਜਗਤ ਕੇ ਜੇਤੇ । ਸੁਗਮ ਅਨੁਗ੍ਰਹ ਤੁਮ੍ਰਰੇ ਤੇਤੇ ।।
ਰਾਮ ਦੁਆਰੇ ਤੁਮ ਰਖਵਾਰੇ । ਹੋਤ ਨ ਆਗਿਆ ਬਿਨੁ ਪੈਸਾਰੇ ।।
ਸਬ ਸੁਖ ਲਹੈ ਤੁਮ੍ਰਾਰੀ ਸਰਨਾ । ਤੁਮ ਰਕਸ਼ਕ ਕਾਹੂ ਕੋ ਡਰਨਾ ।।
ਆਪਨ ਤੇਜ ਸਮ੍ਹਾਰੌ ਆਪੈ । ਤੀਨੋ ਲੋਕ ਹਾੰਕ ਤੇ ਕਾਂਪੈ ।।
ਭੂਤ ਪਿਸਾਚ ਨਿਕਟ ਨਹਿ ਆਵੈ । ਮਹਾਬੀਰ ਜਬ ਨਾਮ ਸੁਨਾਵੈ ।।
ਨਾਸੈ ਰੋਗ ਹਰੈ ਸਬ ਪੀਰਾ । ਜਪਤ ਨਿਰੰਤਰ ਹਨੁਮਤ ਬੀਰਾ ।।
ਸੰਕਟ ਤੇ ਹਨੁਮਾਨ ਛੁਡਾਵੈ । ਮਨ ਕ੍ਰਮ ਬਚਨ ਧਯਾਨ ਜੋ ਲਾਵੈ ।।
ਸਬ ਪਰ ਰਾਮ ਤਪਸਵੀ ਰਾਜਾ । ਤਿਨਕੇ ਕਾਜ ਸਕਲ ਤੁਮ ਸਾਜਾ ।।
ਔਰ ਮਨੋਰਥ ਜੋ ਕੋਈ ਲਾਵੈ । ਸੋਈ ਅਮਿਤ ਜੀਵਨ ਫਲ ਪਾਵੈ ।।
ਚਾਰੋਂ ਜੁਗ ਪਰਤਾਪ ਤੁਮ੍ਹਾਰਾ । ਹੈ ਪਰਸਿਦ੍ਧਿ ਜਗਤ ਉਜਿਯਾਰਾ ।।
ਸਾਧੂ ਸੰਤ ਕੇ ਤੁਮ ਰਖਵਾਰੇ । ਅਸੁਰ ਨਿਕੰਦਨ ਰਾਮ ਦੁਲਾਰੇ ।।
ਅਸ਼ਟ ਸਿਦ੍ਧਿ ਨੌ ਨਿਧਿ ਕੇ ਦਾਤਾ । ਅਸ ਬਰ ਦੀਨਹ ਜਾਨਕੀ ਮਾਤਾ ।।
ਰਾਮ ਰਸਾਯਣ ਤੁਮ੍ਹਰੇ ਪਾਸਾ । ਸਦਾ ਰਹੋ ਰਘੁਪਤਿ ਕੇ ਦਾਸਾ ।।
ਤੁਮ੍ਹਰੇ ਭਜਨ ਰਾਮ ਕੋ ਪਾਵੈ । ਜਨਮ ਜਨਮ ਕੇ ਦੁਖ ਬਿਸਰਾਵੈ ।।
ਅੰਤ ਕਾਲ ਰਘੂਬਰ ਪੁਰ ਜਾਈ । ਜਹਾ ਜਨਮ ਹਰਿ ਭਕਤ ਕਹਾਈ ।।
ਔਰ ਦੇਵਤਾ ਚਿਤੁ ਨ ਧਰਈ । ਹਨੁਮਤ ਸੇਈ ਸਰ੍ਬ ਸੁਖ ਕਰਈ ।।
ਸੰਕਟ ਕਟੈ ਮਿਟੈ ਸਬ ਪੀਰਾ । ਜੋ ਸੁਮਿਰੈ ਹਨੁਮਤ ਬਲਬੀਰਾ ।।
ਜੈ ਜੈ ਜੈ ਹਨੁਮਾਨ ਗੋਸਾਈਂ । ਕ੍ਰਿਪਾ ਕਰੌ ਗੁਰਦੇਵ ਕੀ ਨਾਈਂ ।।
ਜੋ ਸਤ ਬਾਰ ਪਾਠ ਕਰ ਕੋਈ । ਛੂਟਹਿਂ ਬੰਦਿ ਮਹਾ ਸੁਖ ਹੋਈ ।।
ਜੋ ਯਹ ਪਢੈ ਹਨੁਮਾਨ ਚਾਲੀਸਾ । ਹੋਯ ਸਿਦ੍ਧਿ ਸਾਖੀ ਗੌਰੀਸਾ ।।
ਤੁਲਸੀਦਾਸ ਸਦਾ ਹਰਿ ਚੇਰਾ । ਕੀਜੈ ਨਾਥ ਹ੍ਰਦਯ ਮੰਹ ਡੇਰਾ ।।
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કન્નડમાં હનુમાન ચાલીસા

ಹನುಮಾನ್ ಚಾಲಿಸಾ ಕನ್ನಡ

ದೋಹಾ
ಶ್ರೀ ಗುರು ಚರಣ ಸರೋಜ ರಜ ನಿಜಮನ ಮುಕುರ ಸುಧಾರಿ |
ವರಣೌ ರಘುವರ ವಿಮಲಯಶ ಜೋ ದಾಯಕ ಫಲಚಾರಿ ||
ಬುದ್ಧಿಹೀನ ತನುಜಾನಿಕೈ ಸುಮಿರೌ ಪವನ ಕುಮಾರ |
ಬಲ ಬುದ್ಧಿ ವಿದ್ಯಾ ದೇಹು ಮೋಹಿ ಹರಹು ಕಲೇಶ ವಿಕಾರ್ ||
ಧ್ಯಾನಮ್
ಗೋಷ್ಪದೀಕೃತ ವಾರಾಶಿಂ ಮಶಕೀಕೃತ ರಾಕ್ಷಸಮ್ |
ರಾಮಾಯಣ ಮಹಾಮಾಲಾ ರತ್ನಂ ವಂದೇ ಅನಿಲಾತ್ಮಜಮ್ ||
ಯತ್ರ ಯತ್ರ ರಘುನಾಥ ಕೀರ್ತನಂ ತತ್ರ ತತ್ರ ಕೃತಮಸ್ತಕಾಂಜಲಿಮ್ |
ಭಾಷ್ಪವಾರಿ ಪರಿಪೂರ್ಣ ಲೋಚನಂ ಮಾರುತಿಂ ನಮತ ರಾಕ್ಷಸಾಂತಕಮ್ ||
ಚೌಪಾಈ
ಜಯ ಹನುಮಾನ ಜ್ಞಾನ ಗುಣ ಸಾಗರ |
ಜಯ ಕಪೀಶ ತಿಹು ಲೋಕ ಉಜಾಗರ || 1 ||
ರಾಮದೂತ ಅತುಲಿತ ಬಲಧಾಮಾ |
ಅಂಜನಿ ಪುತ್ರ ಪವನಸುತ ನಾಮಾ || 2 ||
ಮಹಾವೀರ ವಿಕ್ರಮ ಬಜರಂಗೀ |
ಕುಮತಿ ನಿವಾರ ಸುಮತಿ ಕೇ ಸಂಗೀ ||3 ||
ಕಂಚನ ವರಣ ವಿರಾಜ ಸುವೇಶಾ |
ಕಾನನ ಕುಂಡಲ ಕುಂಚಿತ ಕೇಶಾ || 4 ||
ಹಾಥವಜ್ರ ಔ ಧ್ವಜಾ ವಿರಾಜೈ |
ಕಾಂಥೇ ಮೂಂಜ ಜನೇವೂ ಸಾಜೈ || 5||
ಶಂಕರ ಸುವನ ಕೇಸರೀ ನಂದನ |
ತೇಜ ಪ್ರತಾಪ ಮಹಾಜಗ ವಂದನ || 6 ||
ವಿದ್ಯಾವಾನ ಗುಣೀ ಅತಿ ಚಾತುರ |
ರಾಮ ಕಾಜ ಕರಿವೇ ಕೋ ಆತುರ || 7 ||
ಪ್ರಭು ಚರಿತ್ರ ಸುನಿವೇ ಕೋ ರಸಿಯಾ |
ರಾಮಲಖನ ಸೀತಾ ಮನ ಬಸಿಯಾ || 8||
ಸೂಕ್ಷ್ಮ ರೂಪಧರಿ ಸಿಯಹಿ ದಿಖಾವಾ |
ವಿಕಟ ರೂಪಧರಿ ಲಂಕ ಜರಾವಾ || 9 ||
ಭೀಮ ರೂಪಧರಿ ಅಸುರ ಸಂಹಾರೇ |
ರಾಮಚಂದ್ರ ಕೇ ಕಾಜ ಸಂವಾರೇ || 10 ||
ಲಾಯ ಸಂಜೀವನ ಲಖನ ಜಿಯಾಯೇ |
ಶ್ರೀ ರಘುವೀರ ಹರಷಿ ಉರಲಾಯೇ || 11 ||
ರಘುಪತಿ ಕೀನ್ಹೀ ಬಹುತ ಬಡಾಯೀ |
ತುಮ ಮಮ ಪ್ರಿಯ ಭರತಹಿ ಸಮ ಭಾಯೀ || 12 ||
ಸಹಸ ವದನ ತುಮ್ಹರೋ ಯಶಗಾವೈ |
ಅಸ ಕಹಿ ಶ್ರೀಪತಿ ಕಂಠ ಲಗಾವೈ || 13 ||
ಸನಕಾದಿಕ ಬ್ರಹ್ಮಾದಿ ಮುನೀಶಾ |
ನಾರದ ಶಾರದ ಸಹಿತ ಅಹೀಶಾ || 14 ||
ಯಮ ಕುಬೇರ ದಿಗಪಾಲ ಜಹಾಂ ತೇ |
ಕವಿ ಕೋವಿದ ಕಹಿ ಸಕೇ ಕಹಾಂ ತೇ || 15 ||
ತುಮ ಉಪಕಾರ ಸುಗ್ರೀವಹಿ ಕೀನ್ಹಾ |
ರಾಮ ಮಿಲಾಯ ರಾಜಪದ ದೀನ್ಹಾ || 16 ||
ತುಮ್ಹರೋ ಮಂತ್ರ ವಿಭೀಷಣ ಮಾನಾ |
ಲಂಕೇಶ್ವರ ಭಯೇ ಸಬ ಜಗ ಜಾನಾ || 17 ||
ಯುಗ ಸಹಸ್ರ ಯೋಜನ ಪರ ಭಾನೂ |
ಲೀಲ್ಯೋ ತಾಹಿ ಮಧುರ ಫಲ ಜಾನೂ || 18 ||
ಪ್ರಭು ಮುದ್ರಿಕಾ ಮೇಲಿ ಮುಖ ಮಾಹೀ |
ಜಲಧಿ ಲಾಂಘಿ ಗಯೇ ಅಚರಜ ನಾಹೀ || 19 ||
ದುರ್ಗಮ ಕಾಜ ಜಗತ ಕೇ ಜೇತೇ |
ಸುಗಮ ಅನುಗ್ರಹ ತುಮ್ಹರೇ ತೇತೇ || 20 ||
ರಾಮ ದುಆರೇ ತುಮ ರಖವಾರೇ |
ಹೋತ ನ ಆಜ್ಞಾ ಬಿನು ಪೈಸಾರೇ || 21 ||
ಸಬ ಸುಖ ಲಹೈ ತುಮ್ಹಾರೀ ಶರಣಾ |
ತುಮ ರಕ್ಷಕ ಕಾಹೂ ಕೋ ಡರ ನಾ || 22 ||
ಆಪನ ತೇಜ ತುಮ್ಹಾರೋ ಆಪೈ |
ತೀನೋಂ ಲೋಕ ಹಾಂಕ ತೇ ಕಾಂಪೈ || 23 ||
ಭೂತ ಪಿಶಾಚ ನಿಕಟ ನಹಿ ಆವೈ |
ಮಹವೀರ ಜಬ ನಾಮ ಸುನಾವೈ || 24 ||
ನಾಸೈ ರೋಗ ಹರೈ ಸಬ ಪೀರಾ |
ಜಪತ ನಿರಂತರ ಹನುಮತ ವೀರಾ || 25 ||
ಸಂಕಟ ಸೇಂ ಹನುಮಾನ ಛುಡಾವೈ |
ಮನ ಕ್ರಮ ವಚನ ಧ್ಯಾನ ಜೋ ಲಾವೈ || 26 ||
ಸಬ ಪರ ರಾಮ ತಪಸ್ವೀ ರಾಜಾ |
ತಿನಕೇ ಕಾಜ ಸಕಲ ತುಮ ಸಾಜಾ || 27 ||
ಔರ ಮನೋರಧ ಜೋ ಕೋಯಿ ಲಾವೈ |
ತಾಸು ಅಮಿತ ಜೀವನ ಫಲ ಪಾವೈ || 28 ||
ಚಾರೋ ಯುಗ ಪರಿತಾಪ ತುಮ್ಹಾರಾ |
ಹೈ ಪರಸಿದ್ಧ ಜಗತ ಉಜಿಯಾರಾ || 29 ||
ಸಾಧು ಸಂತ ಕೇ ತುಮ ರಖವಾರೇ |
ಅಸುರ ನಿಕಂದನ ರಾಮ ದುಲಾರೇ || 30 ||
ಅಷ್ಠಸಿದ್ಧಿ ನವ ನಿಧಿ ಕೇ ದಾತಾ |
ಅಸ ವರ ದೀನ್ಹ ಜಾನಕೀ ಮಾತಾ || 31 ||
ರಾಮ ರಸಾಯನ ತುಮ್ಹಾರೇ ಪಾಸಾ |
ಸಾದ ರಹೋ ರಘುಪತಿ ಕೇ ದಾಸಾ || 32 ||
ತುಮ್ಹರೇ ಭಜನ ರಾಮಕೋ ಪಾವೈ |
ಜನ್ಮ ಜನ್ಮ ಕೇ ದುಖ ಬಿಸರಾವೈ || 33 ||
ಅಂತ ಕಾಲ ರಘುವರ ಪುರಜಾಯೀ |
ಜಹಾಂ ಜನ್ಮ ಹರಿಭಕ್ತ ಕಹಾಯೀ || 34 ||
ಔರ ದೇವತಾ ಚಿತ್ತ ನ ಧರಯೀ |
ಹನುಮತ ಸೇಯಿ ಸರ್ವ ಸುಖ ಕರಯೀ || 35 ||
ಸಂಕಟ ಕಟೈ ಮಿಟೈ ಸಬ ಪೀರಾ |
ಜೋ ಸುಮಿರೈ ಹನುಮತ ಬಲ ವೀರಾ || 36 ||
ಜೈ ಜೈ ಜೈ ಹನುಮಾನ ಗೋಸಾಯೀ |
ಕೃಪಾ ಕರೋ ಗುರುದೇವ ಕೀ ನಾಯೀ || 37 ||
ಜೋ ಶತ ವಾರ ಪಾಠ ಕರ ಕೋಯೀ |
ಛೂಟಹಿ ಬಂದಿ ಮಹಾ ಸುಖ ಹೋಯೀ || 38 ||
ಜೋ ಯಹ ಪಡೈ ಹನುಮಾನ ಚಾಲೀಸಾ |
ಹೋಯ ಸಿದ್ಧಿ ಸಾಖೀ ಗೌರೀಶಾ || 39 ||
ತುಲಸೀದಾಸ ಸದಾ ಹರಿ ಚೇರಾ |
ಕೀಜೈ ನಾಥ ಹೃದಯ ಮಹ ಡೇರಾ || 40 ||
ದೋಹಾ
ಪವನ ತನಯ ಸಂಕಟ ಹರಣ – ಮಂಗಳ ಮೂರತಿ ರೂಪ್ |
ರಾಮ ಲಖನ ಸೀತಾ ಸಹಿತ – ಹೃದಯ ಬಸಹು ಸುರಭೂಪ್ ||
ಸಿಯಾವರ ರಾಮಚಂದ್ರಕೀ ಜಯ | ಪವನಸುತ ಹನುಮಾನಕೀ ಜಯ | ಬೋಲೋ ಭಾಯೀ ಸಬ ಸಂತನಕೀ ಜಯ |
Hanuman Chalisa in Telugu

તેલુગુમાં હનુમાન ચાલીસા

హనుమాన్ చలిసా తెలుగు

దోహా
శ్రీ గురు చరణ సరోజ రజ నిజమన ముకుర సుధారి |
వరణౌ రఘువర విమలయశ జో దాయక ఫలచారి ||
బుద్ధిహీన తనుజానికై సుమిరౌ పవన కుమార |
బల బుద్ధి విద్యా దేహు మోహి హరహు కలేశ వికార్ ||
ధ్యానమ్
గోష్పదీకృత వారాశిం మశకీకృత రాక్షసమ్ |
రామాయణ మహామాలా రత్నం వందే అనిలాత్మజమ్ ||
యత్ర యత్ర రఘునాథ కీర్తనం తత్ర తత్ర కృతమస్తకాంజలిమ్ |
భాష్పవారి పరిపూర్ణ లోచనం మారుతిం నమత రాక్షసాంతకమ్ ||
చౌపాఈ
జయ హనుమాన జ్ఞాన గుణ సాగర |
జయ కపీశ తిహు లోక ఉజాగర || 1 ||
రామదూత అతులిత బలధామా |
అంజని పుత్ర పవనసుత నామా || 2 ||
మహావీర విక్రమ బజరంగీ |
కుమతి నివార సుమతి కే సంగీ ||3 ||
కంచన వరణ విరాజ సువేశా |
కానన కుండల కుంచిత కేశా || 4 ||
హాథవజ్ర ఔ ధ్వజా విరాజై |
కాంథే మూంజ జనేవూ సాజై || 5||
శంకర సువన కేసరీ నందన |
తేజ ప్రతాప మహాజగ వందన || 6 ||
విద్యావాన గుణీ అతి చాతుర |
రామ కాజ కరివే కో ఆతుర || 7 ||
ప్రభు చరిత్ర సునివే కో రసియా |
రామలఖన సీతా మన బసియా || 8||
సూక్ష్మ రూపధరి సియహి దిఖావా |
వికట రూపధరి లంక జరావా || 9 ||
భీమ రూపధరి అసుర సంహారే |
రామచంద్ర కే కాజ సంవారే || 10 ||
లాయ సంజీవన లఖన జియాయే |
శ్రీ రఘువీర హరషి ఉరలాయే || 11 ||
రఘుపతి కీన్హీ బహుత బడాయీ |
తుమ మమ ప్రియ భరతహి సమ భాయీ || 12 ||
సహస వదన తుమ్హరో యశగావై |
అస కహి శ్రీపతి కంఠ లగావై || 13 ||
సనకాదిక బ్రహ్మాది మునీశా |
నారద శారద సహిత అహీశా || 14 ||
యమ కుబేర దిగపాల జహా~ం తే |
కవి కోవిద కహి సకే కహా~ం తే || 15 ||
తుమ ఉపకార సుగ్రీవహి కీన్హా |
రామ మిలాయ రాజపద దీన్హా || 16 ||
తుమ్హరో మంత్ర విభీషణ మానా |
లంకేశ్వర భయే సబ జగ జానా || 17 ||
యుగ సహస్ర యోజన పర భానూ |
లీల్యో తాహి మధుర ఫల జానూ || 18 ||
ప్రభు ముద్రికా మేలి ముఖ మాహీ |
జలధి లాంఘి గయే అచరజ నాహీ || 19 ||
దుర్గమ కాజ జగత కే జేతే |
సుగమ అనుగ్రహ తుమ్హరే తేతే || 20 ||
రామ దుఆరే తుమ రఖవారే |
హోత న ఆజ్ఞా బిను పైసారే || 21 ||
సబ సుఖ లహై తుమ్హారీ శరణా |
తుమ రక్షక కాహూ కో డర నా || 22 ||
ఆపన తేజ తుమ్హారో ఆపై |
తీనో~ం లోక హాంక తే కాంపై || 23 ||
భూత పిశాచ నికట నహి ఆవై |
మహవీర జబ నామ సునావై || 24 ||
నాసై రోగ హరై సబ పీరా |
జపత నిరంతర హనుమత వీరా || 25 ||
సంకట సే~ం హనుమాన ఛుడావై |
మన క్రమ వచన ధ్యాన జో లావై || 26 ||
సబ పర రామ తపస్వీ రాజా |
తినకే కాజ సకల తుమ సాజా || 27 ||
ఔర మనోరధ జో కోయి లావై |
తాసు అమిత జీవన ఫల పావై || 28 ||
చారో యుగ పరితాప తుమ్హారా |
హై పరసిద్ధ జగత ఉజియారా || 29 ||
సాధు సంత కే తుమ రఖవారే |
అసుర నికందన రామ దులారే || 30 ||
అష్ఠసిద్ధి నవ నిధి కే దాతా |
అస వర దీన్హ జానకీ మాతా || 31 ||
రామ రసాయన తుమ్హారే పాసా |
సాద రహో రఘుపతి కే దాసా || 32 ||
తుమ్హరే భజన రామకో పావై |
జన్మ జన్మ కే దుఖ బిసరావై || 33 ||
అంత కాల రఘువర పురజాయీ |
జహా~ం జన్మ హరిభక్త కహాయీ || 34 ||
ఔర దేవతా చిత్త న ధరయీ |
హనుమత సేయి సర్వ సుఖ కరయీ || 35 ||
సంకట కటై మిటై సబ పీరా |
జో సుమిరై హనుమత బల వీరా || 36 ||
జై జై జై హనుమాన గోసాయీ |
కృపా కరో గురుదేవ కీ నాయీ || 37 ||
జో శత వార పాఠ కర కోయీ |
ఛూటహి బంది మహా సుఖ హోయీ || 38 ||
జో యహ పడై హనుమాన చాలీసా |
హోయ సిద్ధి సాఖీ గౌరీశా || 39 ||
తులసీదాస సదా హరి చేరా |
కీజై నాథ హృదయ మహ డేరా || 40 ||
దోహా
పవన తనయ సంకట హరణ – మంగళ మూరతి రూప్ |
రామ లఖన సీతా సహిత – హృదయ బసహు సురభూప్ ||
సియావర రామచంద్రకీ జయ | పవనసుత హనుమానకీ జయ | బోలో భాయీ సబ సంతనకీ జయ |
Hanuman Chalisa in Nepali Translation श्री हनुमान चालिसा को नेपाली अनुवाद

नेपाली अनुवादमा हनुमान चालिसा (नेपाली अनुवाद)

श्री हनुमान चालिसा को नेपाली अनुवाद

श्री हनुमान चालिसा को नेपाली अनुवाद यसप्रकार छ।
श्रीगुरु चरण् सरोजरज, निजमनमुकुर सुधार ।
बरणौ रघुबर बिमल यश, जो दायक फलचार ॥
(अर्थात् श्री गुरु महाराज को चरण कमल को धुलो ले आफ्नो मन रुपि दर्पण लाई पवित्र गरेर श्री रघुवीर को निर्मल यशको वर्णन गर्दछु जो चारै फल धर्म ,अर्थ, काम र मोक्ष दिनेवाला हुनुहुन्छ ।)
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।
बल बुद्धिविद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥
(अर्थात् हे पवनकुमार म तपाईको वन्दना गर्दछु
तपाइलाई थाहानै छ कि मेरो शरीर र बुद्धि निर्बल छ मलाई शारीरिक बल सद्बुद्धि एवं ज्ञान दिनुहोस् र मेरो दु:ख तथा दोष को नाश गर्नुहोस्)
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर ।
जै कपीस तिहुँलोक उजागर ॥
(अर्थात् श्री हनुमान जी तपाईंको जय होस् तपाईंका ज्ञान गुण अथाह छन् हे कपिईस्वर तपाईंको जय होस् तिनै लोक स्वर्गलोक भुलोक र पाताल लोकमा तपाईंकै कृति छ)
रामदूत अतुलित बलधामा ।
अंजनि-पुत्र पवन-सुत नामा ॥
(अर्थात् पवन सूत अञ्जनी नन्दन तपाईंको समान दोस्रो बलवान् संसारमा कोही छैन)
महाबीर बिक्रम बजरंगी ।
कुमति निवार सुमति के संगी ॥
(हे बजरंगबली तपाईं विशेष पराक्रम वाला हुनुहुन्छ
तपाईं भक्तहरूको अमङ्गलकारी विचार हटाउनु हुन्छ र असल बुद्धि प्रदान गर्नको लागि उनीहरूको सहायक हुनुहुन्छ)
कंचन बरण बिराज सुबेशा ।
कानन कुंडल कुंचित केशा ॥
(अर्थात् तपाईं सुनौलो रङ्ग, सुन्दर वस्त्र , कानमा कुण्डल र घुमेको कपालले सुशोभित हुनुहुन्छ )
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै ।
काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥
(अर्थात् तपाइको हातमा बज्र र ध्वजा छन् , काँधमा जनैले शोभा दिएको छ )
शंकर-सुवन केशरी-नन्दन ।
तेज प्रताप महा जग-वंदन ॥
(अर्थात् तपाई शंकरको एक अवतार हुनुहुन्छ हे केसरी नन्दन तपाईंको पराक्रम र महान यश को संसारभरि बन्दना हुने गर्दछ)
विद्यावान गुणी अति चातुर ।
राम काज करिबे को आतुर ॥
(अर्थात् तपाईं प्रकाण्ड विद्यावन गुणवान र अत्यन्त कार्यकुशल भएर श्रीरामको कार्य गर्नको लागि सधैं आतुर रहनुहुन्छ)
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया ।
रामलषण सीता मन बसिया ॥
(अर्थात् तपाई श्री रामचरित सुन्नको लागि आनन्द रस लिनुहुन्छ श्री राम सिता तपाईंको हृदय मा बस्नुहुन्छ
सूक्ष्म रूपधरि सियहिं दिखावा ।
विकट रूप धरि लंक जरावा ॥
(सुक्ष्म रुप धारण गरेर तपाईंले सितालाई देखाउनुभयो र भयंकर रूप लिएर लङ्का जनाउनुभयो)
भीम रूप धरि असुर सँहारे ।
रामचन्द्र के काज सँवारे ॥
(अर्थात् बिकराल रुप धारण गरेर राक्षसहरु को नाश गरिदिनु भयो र श्री रामचन्द्र को उद्देश्य सफल बनाइदिनु भयो)
लाय सजीवन लखन जियाये ।
श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥
(अर्थात् सञ्जीवनी बुटी ल्याएर लक्ष्मणलाई ब्युँताउनु भयो जसको कारण श्री रघुवर हर्षित भएर तपाईंलाई अंगालो हाल्नु भयो)
रघुपति कीन्ही बहुत बडाई ।
तुम मम प्रिय भरतहिसम भाई ॥
(श्री रामचन्द्रले तपाईंको धेरै प्रशंसा गरेर तिमी मेरो भारत जस्तै प्यारो भाइ हौ भनेर भन्नुभयो)
अर्थात् सहस बदन तुम्हरो यश गावैं ।
अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥
(तपाईंको यश हजारौं मुख बाट सराहनीय छ भनेर श्रीरामले तपाईंलाई अँगालो हाल्नुभयो। )
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा ।
नारद शारद सहित अहीशा ॥
(श्री सनक , श्री सनातन , श्री सन्नन्दन श्री सनतकुमार
आदि मुनि ब्रह्मा आदि देवता नारद जी सरस्वती जी ,सेश नाग जी, यमराज कुबेर आदि सब दिशा का रक्षक कवि विद्वान पण्डित या कोईपनि तपाईंको यशको पूर्णतः वर्णन गर्न सक्दैनन्। )
यम कुबेर दिगपाल जहाँते ।
कवि कोविद कहि सकैं कहाँते ॥
(अर्थात् तपाईंले सुग्रीव जीलाई श्रीराम सँग भेटाएर उपकार गर्नु भयो जसको कारण राजा बन्नुभयो)
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना ।
लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥
(तपाईंको उपदेशलाई विभीषण जीले पालन गर्नुभयो जसको कारण उनी राजा बने यो कुरा संसार जान्दछ)
युग सहस्र योजन पर भानू ।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥
(सूर्य यतिधेरै योजन दुरीमा छ कि जहाँ जानकोलागि हजार युग लाग्दछ । 2000 योजनको दूरीमा रहेको सूर्य लाई तपाईले एक मिठो फल सम्झेर निली दिनु भयो)
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं ।
जलधि लाँधि गये अचरजनाहीं ॥
(तपाईंले श्री रामचन्द्रजी को औठी मुखमा राखेर समुद्र तर्नु भयो यसमा कसैलाई आश्चर्य छैन)
दुर्गम काज जगत के जेते ।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥
(संसारमा जुन सुकै कठिन कामहरु भए पनि ती तपाईंको कृपा को कारण हुने सरल हुनेगर्दछ )
राम दुआरे तुम रखवारे ।
होत न आज्ञा बिन पैसारे ॥
(श्री रामचन्द्र जीको द्वारको तपाई द्वारपाल हुनुहुन्छ जसमा तपाईको आज्ञा बिना कसैले प्रवेश पाउँदैन
तपाईंको प्रशन्नता बिना रामको कृपा दुर्लभ छ)
सब सुख लहै तुम्हारी सरना ।
तुम रक्षक काहू को डरना ॥
(जो तपाईंको सरणम आउँछन् उनीहरुलाई आनन्द प्राप्त हुन्छ र जब तपाई रक्षक हुनुहुन्छ भने किन कोहीसँग डराउनु पर्यो र ।)
आपन तेज सम्हारो आपै ।
तीनों लोक हाँकते काँपै ॥
(तपाईं बाहेक तपाईंको वेगलाई कसैले रोक्न सक्दैन तपाईंको गजर्नबाट तीनै लोक कापदछ )
भूत पिशाच निकट नहिं आवै ।
महाबीर जब नाम सुनावै ॥
(महावीर हनुमानको नाम सुनाइएपछि भूत पिशाच नजिक आउँन सक्दैन)
नाशौ रोग हरै सब पीरा ।
जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥
(वीर हनुमान जी तपाइको निरन्तर जप गर्नाले सबै रोग हट्ने गर्दछ र सबै पीडा मेटिनेछ )
संकट से हनुमान छुडावै ।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥
(विचार गर्दा , कर्म गरदा र बोल्दा जसको ध्यान तपाईं मा रहन्छ उनीहरु को सबै सङ्कटबाट तपाईं छुटकारा प्रदान गर्नु हुन्छ )
सब पर राम तपस्वी राजा ।
तिनके काज सकल तुम साजा ॥
(तपस्वी राजा श्री रामचन्द्र सबैको श्रेष्ठ हुनुहुन्छ उनकै सबै कार्यहरु तपाईले सहज गरिदिनुहुन्छ)
और मनोरथ जो कोइ लावै ।
सोइ अमित जीवन फल पावै ॥
(जसमाथि तपाईंको कृपा हुन्छ उसले कुनै पनि अभिलाषा राखेको छ उसलाई त्यस्तो फल मिल्ने गर्दछ जसको जीवनमा कुनै सीमा नै हुन्न )
चारों युग परताप तुम्हारा ।
है परसिद्ध जगत उजियारा ॥
(चारै युगमा तपाईँको यस फैलिएको छ जगत्मा तपाईंको कृति सर्वत्र प्रकाश मान छ )
साधु संत के तुम रखवारे ।
असुर निकंदन राम दुलारे ॥
(हे श्री राम का प्रिय तपाईं सज्जन हरुको रक्षा गर्नुहुन्छ र दुष्टहरूको नाश गर्नु हुन्छ )
अष्टसिद्धि नव निधि के दाता ।
अस बर दीन जानकी माता ॥
(तपाईंलाई माता श्री जानकी बाट यस्तै बरदान मिलेको छ
जसको कारण तपाईं कसैलाई पनि 8 वटा सिद्धि र नौवटा निधि दिन सक्नुहुन्छ )
राम रसायन तुम्हरे पासा ।
सदा रहो रघुपति के दासा ॥
(तपाईको निरन्तर श्री रघुनाथ को सरणमा रहनुहुन्छ त्यसैले तपाईंसँग वृद्ध अवस्था र असाध्य रोगको नाशको लागि रामनाम औषधि छ )
तुम्हरे भजन रामको पावै ।
जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥
(तपाईंको भजन गाउने वाला ले श्रीराम प्राप्त गर्न सक्छ र जन्म जन्मान्तरको दुख बाट दुर हुनसक्छ )
अन्त काल रघुपति पुर जाई ।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥
(श्री रघुनाथजीको धाममा जान्छ र यदि फेरि जन्म लिन्छ भने पनि भक्ति गरेर राम भक्त कहलिन्छ ।)
और देवता चित्त न धरई ।
हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥
(तपाईंको सेवा गर्नाले सबै प्रकारका मिल्दछ र फेरि अन्य कुनै देवताको आवश्यकता पनि पर्दैन)
संकट हरै मिटै सब पीरा ।
जो सुमिरै हनुमत बल बीरा ॥
(हे हनुमानजी जो तपाईंको सुमिरन गर्दछ उसको सबै संकट कट्दछन र सबै पीडा मेटिन्छन् )
जै जै जै हनुमान गोसाई ।
कृपा करहु गुरुदेव की नाई ॥
(हे स्वामी हनुमान जी तपाईंको जय होस् तपाईं मा माथि कृपा गरिदिनुहोस ।)
जोह शत बार पाठ कर जोई ।
छुटहि बन्दि महासुख होई ॥
(जो कोही यस हनुमान चालीसा लाई सय चोटी पाठ गर्दछ ऊ सबै बन्धनहरु बाट छुटकारा पाउँदछ र परम आनन्द मिल्नेछ प्राप्त गर्दछ।)
जो यह पढै हनुमान चालीसा ।
होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥
(भगवान शंकरले यो हनुमान चालीसा लेखाउनुभयो
त्यसैले उहाँ साक्षी हुनुहुन्छ जो कोही यो हनुमान चालीसा पढ्छ उसलाई निश्चय नै सफलता प्राप्त हुन्छ ।)
तुलसीदास सदा हरि चेरा ।
कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥
(हे नाथ हनुमानजी तुलसीदास सदा तपाईंको दास हुन् त्यसैले तपाईं उनको हृदय मा बास गर्नुहोस्)
पवनतनय संकट हरन,
मंगल मूरति रूप ।
रामलषन सीता सहित,
हृदय बसहु सुरभूप ॥
(हे संकट मोचक पवनकुमार , तपाईंको आनन्ददायी माङ्गलिक स्वरूप छ, हे देवराज , तपाईं श्री राम , सीता र लक्ष्मण सहित मेरो हृदय मा बास गर्नुहोस्)

मूल हनुमान चालीसा वीडियो

हनुमान चालीसा वीडियो, ऑडियो (Mp3/MP4)

रोमन हिंदी में हनुमान चालीसा (एकल छवि/वॉलपेपर)

हनुमान चालीसा एक पृष्ठ में (Roman Hindi)

Hanuman Chalisa in one image wallpaper single picture हनुमान चालीसा एक पृष्ठ में (Roman Hindi)
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हिंदी में हनुमान चालीसा एक पृष्ठ (वॉलपेपर)

हनुमान चालीसा एक पृष्ठ में (हिन्दी Wallpaper)

Hanuman Chalisa Hindi Marathi in one page wallpaper हनुमान चालीसा हिन्दी
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Comments

  1. “Impure English Language” ??
    You are discussing the divinity in this article, by insulting other languages you are ruining the positivity with your negativity.

    1. Radhe Radhe Anjali Ji,
      The translation is done by Venkatensh ji and we are very happy with it. English is such a language that no one can claim to be master of it. You can identify errors even in an article written by an english (see the contradiction 🙂 ). Anyways, your concerns are uncalled for since it is different from the essence of this post.
      This site is not to improve english or spread the foreign language. We are purely concerned in spreading the true essence of Hinduism and reclaim our glory which is blurred by west inclined anti-Hindu historians. Please discuss on the essence of the post. And also suggest relevant topics which can be included in future posts. Be proud of our sanskriti than enslaving to become protector of foreign language. We are interested in conveying the message. We do not waste time in re-edits…the quicker, message is understood in simple english better it is.
      Jai Shree Krishn

      1. “Om jai hanumanaki jai”.People’s pls read hanuman chalisa daily in the fast life…. powerful one..Sivayanama
        “Rama lakshmana janaki jai bolo hanumanaki”

  2. After reading this site you have helped me to further realize the power of this chanting.I had the habit of chanting and from now on I will chant with much devotion.

    1. Radhe Radhe Subhapriya Ji,
      Thanks for the feedback. Please read all the posts and share the knowledge of ancient Hindu values and wisdom with friends, fellow Hindus and relatives.
      Jai Shree Krishn

    1. Radhe Radhe Kannan Ji,
      Jai Shree Ram
      Ab samay aa gaya hai hum sabhi milkar desh ke Hinduo ko ek kare aur desh ko Vishwa Guru banaye. Ab hum yeh bhi nahi bol sakte ki sarkar hum logo ki nahi hai.
      Ram Mandir bhi banega aur Bharat Mata Vishwa Guru bhi.
      Jai Shree Krishn

  3. I agree with you. Hanuman Chalisa indeed works as a positive factor for me. Call it psychological or whatever effect but I do feel good when I recite it. I make sure I do it on daily basis. Jai Shree Ram

    1. Radhe Radhe Anushree Ji,
      We appreciate you chant Hanuman Chalisa on daily basis and it has positive impact on your life.
      Thanks for sharing your experience.
      Nothing is psychological, the entire world revolves around positivity and negativity. When you are positive mentally and physically, you can work wonders for yourself. Hanuman Chalisa and Chant of Bhagwan help in generating positivity in our body. We originated from Bhagwan and we will again go back to him after we attain moksha. So chanting names of Bhagwan lead to following Sattvic way of life that keep us healthy and peaceful. Keep chanting and spread the message to your friends and wellwishers.
      Jai Shree Krishn

  4. This site is very helpful. I have been chanting Hanumaan chalisa 2 or 3 times a day since 12 years . I feel lot of energy inside me . Jai shree ram Jai hanumaan .

    1. Radhe Radhe Praveen Ji,
      Yes it does. Also to please Hanuman you can chant जय श्री राम ‘Jai Shree Ram’ 108 times daily.
      Thanks for the feedback. Please read other posts and share them in social media sites if you find that the information should be shared with our like-minded Hindu brothers and sisters.
      Jai Shree Krishn

    1. Radhe Radhe Anand Ji,
      Thanks for sharing your experience.
      Please ask your friends and well-wishers recite Hanuman Chalisa so that they can also feel positively energized and work for the betterment of family and society.
      Please read other posts and give your suggestions/feedbacks.
      Jai Shree Krishn

    1. Hey Bajarangbali Hey hanumaandada Hey Sitaram !
      Hey Prabhu Hey madi Hay Prabhu
      -Tino lok ma, Akhil brahmand, ma Samast shrusti ma aapni shakti no,
      appni kirti no, aapni bhakti no, aapna mahatmya no, aapna devatya no. appna devityano aapna devatya no, aapna sat no aapni swyambhuta no jayjaykar ho ……..
      -Hey Prabhu Hey madi Hay Prabhu Khub khub atrhik sasirik mansik kudarati bhautik sukh shanti sampati samrudhi sundarat manoharta
      divyata bhavyata vadhe hey prabhu hey madi hey prabhu aapna dham ma
      *****Jay Bajarangbali Jay Hanumaandada Jay Sitaram*****